पेट, लिवर और पाचन

कब्ज का घरेलू उपाय: कब्ज के लिए 6 आसान योगासन

कब्ज बहुत आम है और अक्सर छोटे-छोटे बदलावों से ठीक हो जाती है। हल्के ट्विस्ट, उकड़ू बैठना, गुनगुना पानी, फाइबर और सुबह की तय दिनचर्या पेट को फिर से अपनी लय में लाने में मदद कर सकते हैं।

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कब्ज ऐसी परेशानी है जिसके बारे में लोग कम ही बात करते हैं, फिर भी लगभग हर किसी को कभी न कभी होती है। हो सकता है कई दिन तक पेट साफ न हो, टॉयलेट में ज़ोर लगाना पड़े, मल सख्त और सूखा हो, या लगे कि पेट पूरी तरह खाली ही नहीं हुआ। इससे भारीपन, पेट फूलना, चिड़चिड़ापन और थकान महसूस हो सकती है।

ज़्यादातर लोगों में कब्ज किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती, और अक्सर कुछ नियमित बदलावों से ठीक हो जाती है: ज़्यादा पानी और फाइबर, रोज़ चलना-फिरना, टॉयलेट में आराम से बैठना और कम हड़बड़ी। योग इसमें अच्छा साथ दे सकता है। यह पेट की हल्की मालिश करता है, नर्वस सिस्टम को शांत करता है और रोज़ की लय बनाने में मदद करता है। यहां 6 योगासन, रसोई के घरेलू उपाय और आदतें दी गई हैं, जिन्हें आप आज़मा सकते हैं।

इस गाइड में

कब्ज क्यों होती है

खाने का बचा हुआ हिस्सा बड़ी आंत में लहर जैसी मांसपेशियों की हरकत से आगे बढ़ता है, और इस दौरान आंत उसमें से पानी सोखती है। अगर यह हरकत धीमी हो जाए, तो ज़्यादा पानी सोख लिया जाता है और मल सख्त, सूखा और निकालने में मुश्किल हो जाता है।

आम कारण ये हैं:

  • सब्ज़ी, फल, साबुत अनाज और दालों से कम फाइबर मिलना
  • पानी और दूसरे तरल कम पीना
  • ज़्यादा देर बैठे रहना और कम चलना-फिरना
  • टॉयलेट जाने की इच्छा को टालना या सुबह जल्दबाज़ी करना
  • सफर, दिनचर्या में बदलाव और तनाव
  • कुछ दवाएं, जैसे आयरन की गोलियां, तेज़ दर्द निवारक दवाएं और कुछ एंटीडिप्रेसेंट
  • प्रेगनेंसी, थायरॉइड का कम काम करना और कुछ दूसरी बीमारियां

आयुर्वेद क्या कहता है: रूखा, ठंडा वात

आयुर्वेद में कब्ज को विबंध कहा जाता है और इसे मुख्य रूप से वात का असंतुलन माना जाता है। शरीर की हर हरकत वात से चलती है, इसमें नीचे की ओर जाने वाली वह ऊर्जा भी शामिल है जिसे अपान वायु कहते हैं और जो मल त्याग के लिए ज़िम्मेदार है। जब ठंडे और रूखे खाने, खाना छोड़ने, देर रात तक जागने, सफर या चिंता से वात बहुत रूखा, ठंडा और अनियमित हो जाता है, तो आंतें भी सूखी और सुस्त हो जाती हैं।

आयुर्वेद का उपाय है गर्माहट, नमी और नियमित दिनचर्या लाना: सुबह उठते ही गुनगुना पानी, थोड़े घी या तेल के साथ पका हुआ खाना, खाने और सोने का तय समय, हल्की तेल मालिश और ऐसे अभ्यास जो मन को स्थिर करें।

योग कब और कैसे करें

सुबह का समय सबसे अच्छा है। एक-दो गिलास गुनगुना पानी पिएं, कुछ मिनट रुकें, फिर नीचे दिए आसन धीरे-धीरे करें। गुनगुना पानी और हल्की हरकत मिलकर सुबह पेट साफ होने की प्राकृतिक इच्छा को जगा सकते हैं।

टॉयलेट पर बैठते समय पैरों के नीचे एक छोटा स्टूल रखें, ताकि घुटने कूल्हों से ऊपर रहें। यह उकड़ू जैसी स्थिति मल के रास्ते को सीधा करती है और पेट खाली करना आसान बना सकती है। सांस रोककर ज़ोर लगाने की जगह धीरे-धीरे सांस छोड़ें।

फ़ायदा देने वाले योगासन

  1. 1

    मलासन

    Malasana

    1. पैरों को कूल्हों से थोड़ा ज़्यादा खोलकर खड़े हों, पंजे थोड़े बाहर की ओर।
    2. घुटने मोड़ें और कूल्हों को ज़मीन की ओर नीचे लाएं। ज़रूरत हो तो कूल्हों के नीचे ब्लॉक या तकिया, या एड़ियों के नीचे मोड़ा हुआ कंबल रखें।
    3. हथेलियां छाती के सामने जोड़ें और कोहनियों से घुटनों के अंदरूनी हिस्से को हल्का दबाएं।
    4. रीढ़ सीधी रखें और पेट के निचले हिस्से में गहरी सांस भरें।
    कितनी देर रुकें: 30-60 सेकंड, 2-3 बार

    यह उकड़ू बैठने की प्राकृतिक स्थिति है, जो आंतों में नीचे की ओर हरकत को बढ़ावा दे सकती है।

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  2. 2

    पवनमुक्तासन

    Pavanamuktasana

    1. पीठ के बल लेटें, दोनों पैर सीधे रखें।
    2. दाहिना घुटना छाती की ओर लाएं और दोनों हाथों से पकड़ें।
    3. धीरे-धीरे सांस लें, फिर बाएं पैर से करें।
    4. आखिर में दोनों घुटनों को पकड़ें और धीरे-धीरे दाएं-बाएं झूलें।
    कितनी देर रुकें: हर तरफ 5-8 सांसें, फिर दोनों घुटनों के साथ 5 सांसें

    दाईं ओर बड़ी आंत के ऊपर जाने वाले हिस्से और बाईं ओर नीचे आने वाले हिस्से पर हल्का दबाव डालता है।

  3. 3

    सुप्त मत्स्येन्द्रासन

    Supta Matsyendrasana

    1. पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़ें और पैर ज़मीन पर रखें।
    2. दोनों हाथ कंधों की ऊंचाई पर साइड में फैला दें।
    3. दोनों घुटनों को धीरे से दाहिनी ओर नीचे लाएं और नज़र बाईं ओर घुमाएं।
    4. गहरी सांस लें, बीच में लौटें और दूसरी तरफ दोहराएं।
    कितनी देर रुकें: हर तरफ 6-10 सांसें

    ट्विस्ट से पेट की मालिश होती है और सुस्त आंतों में हरकत आ सकती है।

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  4. 4

    भुजंगासन

    Bhujangasana

    1. पेट के बल लेटें, हथेलियां कंधों के नीचे और कोहनियां शरीर के पास रखें।
    2. पैरों के ऊपरी हिस्से और कूल्हों को ज़मीन पर दबाएं।
    3. सांस लेते हुए सिर और छाती ऊपर उठाएं, कोहनियां थोड़ी मुड़ी रहें।
    4. कुछ सांसें लें, फिर सांस छोड़ते हुए धीरे से नीचे आ जाएं।
    कितनी देर रुकें: 3-5 सांसें, 3 राउंड

    पेट में खिंचाव लाता है और पाचन अंगों को सक्रिय करता है।

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  5. 5

    अर्ध मत्स्येन्द्रासन

    Ardha Matsyendrasana

    1. पैर सीधे करके बैठें, दाहिना घुटना मोड़ें और दाहिना पैर बाएं घुटने के बाहर रखें।
    2. बायां पैर सीधा रखें, या उसे मोड़कर एड़ी दाहिने कूल्हे के पास रखें।
    3. सांस लेते हुए रीढ़ लंबी करें, सांस छोड़ते हुए दाहिनी ओर मुड़ें और बाएं हाथ से घुटने को पकड़ें।
    4. रुकें, सांस लेते रहें, फिर छोड़ें और दूसरी तरफ दोहराएं।
    कितनी देर रुकें: हर तरफ 5-8 सांसें

    पहले दाहिनी और फिर बाईं ओर मुड़ना बड़ी आंत की दिशा के साथ चलता है।

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  6. 6

    बालासन

    Balasana

    1. घुटनों के बल बैठें और घुटने थोड़े खोलकर एड़ियों पर पीछे बैठ जाएं।
    2. आगे झुकें और माथा ज़मीन या तकिए पर टिका दें।
    3. हाथ शरीर के बगल में रखें या आगे फैला दें।
    4. पेट और कमर के निचले हिस्से में धीरे-धीरे सांस भरें।
    कितनी देर रुकें: 1-2 मिनट

    नर्वस सिस्टम को शांत करता है और हर सांस के साथ पेट की हल्की मालिश करता है।

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प्राकृतिक और आयुर्वेदिक नुस्खे

सुबह उठते ही गुनगुना पानी

कैसे करें: सुबह सबसे पहले, चाय या कॉफी से पहले, एक-दो गिलास गुनगुना पानी पिएं। कुछ लोग इसमें थोड़ा नींबू निचोड़ लेते हैं।

यह क्यों फ़ायदा करता है: सुबह गर्म पानी पीने से शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया (गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स) जाग सकती है, जिससे पेट साफ होने की इच्छा होती है।

रात को त्रिफला

कैसे करें: आधा से एक चम्मच त्रिफला चूर्ण एक कप गुनगुने पानी में मिलाएं और सोने से करीब एक घंटा पहले पिएं, या पैकेट पर लिखे तरीके से गोलियां लें।

यह क्यों फ़ायदा करता है: तीन फलों से बना यह पुराना आयुर्वेदिक चूर्ण परंपरा से आंतों के हल्के टॉनिक के रूप में लिया जाता है। प्रेगनेंसी में इसे न लें, और अगर मरोड़ या दस्त हों तो बंद कर दें।

भीगे हुए आलूबुखारे, अंजीर या किशमिश

कैसे करें: 4-5 सूखे आलूबुखारे (प्रून), 2 सूखे अंजीर या एक छोटी मुट्ठी किशमिश रात भर पानी में भिगोएं और सुबह भिगोने वाले पानी के साथ खा लें।

यह क्यों फ़ायदा करता है: इनमें फाइबर और सॉर्बिटॉल होता है, जो आंतों में पानी खींचते हैं और मल को नरम करते हैं।

इसबगोल

कैसे करें: एक से दो चम्मच इसबगोल की भूसी एक बड़े गिलास पानी या गुनगुने दूध में मिलाएं, तुरंत पी लें और उसके बाद एक गिलास पानी और पिएं।

यह क्यों फ़ायदा करता है: इसका घुलने वाला फाइबर एक नरम जेल बनाता है, जो मल को भारी और नम बनाता है। इसे हमेशा भरपूर पानी के साथ लें।

गुनगुने दूध या पानी में घी

कैसे करें: सोते समय एक कप गुनगुने दूध या गुनगुने पानी में एक चम्मच घी मिलाकर पिएं।

यह क्यों फ़ायदा करता है: आयुर्वेद में घी का इस्तेमाल रूखी, वात वाली आंतों को चिकनाई देने के लिए होता है। यह कभी-कभार के लिए ठीक है, कम फैट वाली डाइट पर चल रहे लोगों के लिए नहीं।

घड़ी की दिशा में पेट की मालिश

कैसे करें: पीठ के बल लेटकर गुनगुने तिल के तेल से 5-10 मिनट पेट की मालिश करें। घड़ी की दिशा में धीरे-धीरे गोल घुमाएं: नीचे दाईं ओर से ऊपर, फिर पेट के आर-पार, और बाईं ओर नीचे।

यह क्यों फ़ायदा करता है: बड़ी आंत के रास्ते के साथ मालिश करने से मल आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है और पेट की मांसपेशियां ढीली होती हैं।

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रोज़ की आदतें

  • दिन भर में भरपूर पानी पिएं, और अगर फाइबर बढ़ा रहे हैं तो और ज़्यादा।
  • रोज़ सब्ज़ियां, फल, दालें और साबुत अनाज खाएं, और फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाएं।
  • रोज़ एक ही समय पर, हो सके तो नाश्ते के बाद, आराम से टॉयलेट जाने का समय रखें।
  • टॉयलेट जाने की इच्छा को कभी न टालें।
  • टॉयलेट पर पैरों के नीचे छोटा स्टूल रखें, ताकि घुटने कूल्हों से ऊपर रहें।
  • रोज़ कम से कम 20-30 मिनट पैदल चलें।
  • अगर आपका खाना बहुत रूखा है, तो पके खाने में एक चम्मच घी या अच्छा तेल डालें।

लोग अक्सर पूछते हैं

कब्ज से जल्दी राहत का सबसे अच्छा प्राकृतिक तरीका क्या है?

एक-दो गिलास गुनगुना पानी पिएं, फिर कुछ मिनट हल्की हरकत करें, जैसे पवनमुक्तासन, लेटकर ट्विस्ट या तेज़ चाल से टहलना। टॉयलेट पर पैरों को स्टूल पर ऊंचा रखकर बैठें और धीरे-धीरे सांस लें। भीगे हुए आलूबुखारे अक्सर एक दिन के अंदर मदद करते हैं।

पेट साफ करने के लिए कौन से योगासन करें?

मलासन, पवनमुक्तासन, लेटकर और बैठकर किए जाने वाले ट्विस्ट और भुजंगासन सबसे ज़्यादा बताए जाते हैं। इन्हें रोज़ सुबह नियमित करना, सिर्फ कब्ज होने पर करने से ज़्यादा असर करता है।

कितने दिन पेट साफ न हो तो चिंता करें?

दिन में तीन बार से लेकर हफ्ते में तीन बार तक पेट साफ होना सामान्य माना जाता है। अगर तीन दिन से ज़्यादा हो जाएं और बेचैनी हो, या आपकी सामान्य आदत कुछ हफ्तों से ज़्यादा समय तक बदली रहे, तो डॉक्टर से बात करें।

क्या रोज़ त्रिफला लेना सुरक्षित है?

बहुत लोग हफ्तों तक बिना दिक्कत त्रिफला लेते हैं, पर इसे थोड़े समय की मदद की तरह लेना बेहतर है, जब तक आप अपना खाना और दिनचर्या सुधार रहे हैं। प्रेगनेंसी और स्तनपान के दौरान इसे न लें, और अगर आप दूसरी दवाएं लेते हैं तो डॉक्टर से पूछें।

सावधानी · डॉक्टर को कब दिखाएँ

डॉक्टर को दिखाएं अगर कब्ज तीन हफ्ते से ज़्यादा चले, अगर पेट साफ होने की आदत में यह नया बदलाव हो, खासकर 50 साल की उम्र के बाद, या अगर मल में खून दिखे, काला मल हो, बिना वजह वज़न घटे, पेट में तेज़ या लगातार दर्द हो, पेट फूलने के साथ उल्टी हो, या मल और गैस बिल्कुल न निकले। आखिरी स्थिति में तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है। अगर कब्ज कोई नई दवा शुरू करने के बाद हुई है, तो डॉक्टर से बात करें। प्रेगनेंसी में, पेट के ऑपरेशन के बाद या हर्निया होने पर गहरे ट्विस्ट और पेट पर ज़ोर का दबाव न डालें, और घुटनों में तकलीफ हो तो गहरी उकड़ू स्थिति न करें। डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक जुलाब (लैक्सेटिव) पर निर्भर न रहें, हर्बल जुलाब पर भी नहीं। ये तरीके पेट नियमित साफ होने में मदद कर सकते हैं, पर डॉक्टरी जांच या इलाज की जगह नहीं लेते।

यह गाइड सिर्फ़ आम जानकारी के लिए है और डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेती। आराम से अभ्यास करें, दर्द होने तक कभी न खिंचें, और अगर आपको कोई बीमारी है, आप गर्भवती हैं या कोई दवा ले रहे हैं, तो किसी योग्य विशेषज्ञ से बात करें।

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