थायराइड के लिए योग: हाइपो और हाइपर थायराइड में आसान आसन
हल्का योग, शांत करने वाले प्राणायाम और खान-पान की समझदार आदतें, जो सही जांच और इलाज के साथ थायराइड में आपको बेहतर महसूस करने में मदद कर सकती हैं।
थायराइड गर्दन के आगे की ओर तितली के आकार की एक छोटी-सी ग्रंथि है, लेकिन इसका असर लगभग हर चीज़ पर होता है: आपकी एनर्जी, वज़न, शरीर का तापमान, दिल की धड़कन, मूड, त्वचा, बाल और पाचन। जब यह कम हार्मोन बनाती है (हाइपोथायराइडिज्म), तो आप थका हुआ, ठंडा, भारी और दिमाग़ में धुंधलापन महसूस कर सकते हैं। जब यह ज़्यादा हार्मोन बनाती है (हाइपरथायराइडिज्म), तो बेचैनी, गर्मी, हाथ काँपना, नींद न आना और दिल की तेज़ धड़कन हो सकती है।
थायराइड का पता खून की जांच से चलता है और आमतौर पर इसका इलाज दवा से होता है, अक्सर पूरी ज़िंदगी। योग इसकी जगह नहीं ले सकता। लेकिन योग आपको हल्की हलचल, ज़्यादा स्थिर एनर्जी, कम stress और अपने शरीर के साथ ज़्यादा प्यार भरा रिश्ता दे सकता है, ख़ासकर तब जब शरीर आपके कंट्रोल से बाहर लगे। इस लेख में गर्दन और पूरे शरीर के लिए सुरक्षित आसन, शांत करने वाले प्राणायाम और खान-पान की आदतें हैं। ये डॉक्टर के इलाज में साथ देती हैं, उसकी जगह कभी नहीं लेतीं।
इस गाइड में
थायराइड का असंतुलन क्या है
थायराइड ग्रंथि T4 और T3 हार्मोन बनाती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज़्म की रफ़्तार तय करते हैं। इसे दिमाग़ की पिट्यूटरी ग्रंथि से निकलने वाला TSH कंट्रोल करता है। आयोडीन वाला नमक इस्तेमाल करने वाले देशों में, जिनमें आज भारत भी है, थायराइड कम होने की सबसे आम वजह हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस है, जो एक ऑटोइम्यून बीमारी है। थायराइड ज़्यादा होने की सबसे आम वजह ग्रेव्स डिज़ीज़ है, यह भी ऑटोइम्यून है। आयोडीन की कमी, प्रेगनेंसी, कुछ दवाएँ और गाँठें (नोड्यूल) भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं।
अकेले stress से थायराइड नहीं होता, लेकिन लंबे समय का stress इम्यून सिस्टम और हार्मोन के संतुलन पर असर डालता है। बहुत से लोग देखते हैं कि मुश्किल दिनों में उनके लक्षण बढ़ जाते हैं। हल्का योग और धीमी साँस stress, थकान और उदासी कम करने में मदद कर सकते हैं। कुछ छोटी स्टडीज़ बताती हैं कि हाइपोथायराइडिज्म वाले लोगों में योग से जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
आयुर्वेद में थायराइड कम होने को अक्सर कफ का बढ़ना और मंद अग्नि माना जाता है (भारीपन, सुस्ती, वज़न बढ़ना)। थायराइड ज़्यादा होना पित्त और वात के बढ़ने जैसा है (गर्मी, बेचैनी, वज़न घटना)। पारंपरिक तरीका यह है कि पहली स्थिति में शरीर को गरमाहट और हल्की ऊर्जा दी जाए, और दूसरी में ठंडक और शांति।
थायराइड में सुरक्षित तरीके से योग कैसे करें
अभ्यास अपनी हालत के हिसाब से चुनें। हाइपोथायराइडिज्म में हल्की, नियमित हलचल एनर्जी बढ़ाने में मदद कर सकती है। हाइपरथायराइडिज्म में, जब तक आपका लेवल कंट्रोल न हो जाए, धीमे, ठंडक देने वाले और शांत करने वाले अभ्यास बेहतर हैं, क्योंकि आपका दिल पहले से ज़्यादा मेहनत कर रहा हो सकता है।
- सर्वांगासन और हलासन को अक्सर थायराइड के आसन कहा जाता है, लेकिन इनमें गर्दन पर बहुत दबाव पड़ता है। जब तक आप अनुभवी न हों और किसी टीचर से सामने बैठकर न सीखा हो, इन्हें न करें।
- अगर आपको घेंघा (गॉइटर), गाँठें, हाल में थायराइड की सर्जरी या गर्दन की कोई तकलीफ़ है, तो गर्दन को कम हिलाएँ और ठुड्डी को छाती पर ज़ोर से न दबाएँ।
- थायराइड ज़्यादा होने पर हॉट योगा, तेज़ फ़्लो और कपालभाति जैसी तेज़ साँस वाली क्रियाएँ न करें।
- अगर धड़कन तेज़ हो, सीने में दर्द हो, चक्कर आए या असामान्य रूप से साँस फूले, तो तुरंत रुक जाएँ।
फ़ायदा देने वाले योगासन
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1
ग्रीवा संचालन (गर्दन का हल्का व्यायाम)
Greeva Sanchalana
- सीधे बैठें और कंधे ढीले छोड़ दें।
- साँस छोड़ते हुए दायाँ कान धीरे से दाएँ कंधे की ओर झुकाएँ, साँस लेते हुए बीच में वापस आएँ, फिर बाईं ओर दोहराएँ।
- साँस छोड़ते हुए ठुड्डी को थोड़ा छाती की ओर लाएँ, साँस लेते हुए सीधा करें। सिर को पीछे की ओर न गिराएँ।
- धीरे-धीरे करें और उतना ही हिलाएँ जितना आराम से हो।
कितनी देर रुकें: हर दिशा में 3-5 बार धीरे-धीरेगर्दन और कंधों का तनाव कम करता है और गले के आसपास आराम देता है।
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2
मार्जरी आसन (कैट-काउ)
Marjaryasana-Bitilasana
- हाथों और घुटनों के बल आ जाएँ, कलाइयाँ कंधों के नीचे और घुटने कूल्हों के नीचे।
- साँस लेते हुए पेट नीचे जाने दें और छाती व नज़र थोड़ा ऊपर उठाएँ।
- साँस छोड़ते हुए पीठ गोल करें और सिर को ढीला नीचे आने दें।
- साँस के साथ-साथ लय में करें।
कितनी देर रुकें: 6-10 राउंडरीढ़ को गरम करता है और गर्दन को दोनों दिशाओं में हल्के से हिलाता है।
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3
भुजंगासन
Bhujangasana
- पेट के बल लेटें और हथेलियाँ कंधों के नीचे रखें।
- पैरों के ऊपरी हिस्से को ज़मीन पर दबाएँ और कंधे पीछे खींचें।
- साँस लेते हुए सिर और छाती थोड़ा ऊपर उठाएँ, कोहनियाँ मुड़ी रहें और गर्दन का पिछला हिस्सा लंबा रहे।
- साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे आएँ।
कितनी देर रुकें: 3-5 साँस, 2-3 राउंडछाती और गर्दन के आगे के हिस्से को धीरे से खोलता है और एनर्जी बढ़ाने में मदद कर सकता है।
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4
सेतुबंधासन
Setu Bandhasana
- पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़ें और पैर कूल्हों जितनी दूरी पर रखें।
- पैरों से ज़मीन दबाते हुए कूल्हे ऊपर उठाएँ।
- नज़र ऊपर रखें और ऊपर रहते हुए सिर न घुमाएँ।
- धीरे-धीरे नीचे आएँ। आराम वाले रूप के लिए कमर के निचले हिस्से (सैक्रम) के नीचे एक ब्लॉक रख सकते हैं।
कितनी देर रुकें: 5-8 साँस, 2-3 राउंडसर्वांगासन का हल्का विकल्प, जो गर्दन के आगे के हिस्से पर धीरे से काम करता है और टाँगों को मज़बूत करता है।
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5
सहारे वाला मत्स्यासन
Matsyasana (supported)
- एक मुड़ा हुआ कंबल या लंबा तकिया (बोल्स्टर) लंबाई में पीठ के ऊपरी हिस्से के नीचे रखें।
- पीछे लेट जाएँ ताकि छाती खुले। सिर के नीचे तकिया रखें ताकि गर्दन ज़्यादा पीछे न मुड़े।
- हाथ शरीर के पास रखें, हथेलियाँ ऊपर की ओर।
- छाती में धीरे-धीरे साँस भरें।
कितनी देर रुकें: 2-4 मिनटसहारे के साथ आराम से छाती और गले के हिस्से को खोलता है।
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6
उज्जायी प्राणायाम
Ujjayi Pranayama
- मुँह बंद करके आराम से बैठें।
- गले के पिछले हिस्से को हल्का-सा सिकोड़ें, ताकि साँस से समुद्र की लहरों जैसी धीमी आवाज़ आए।
- नाक से धीरे-धीरे साँस लें और छोड़ें, आवाज़ हल्की और एक-सी रखें।
- साँस न रोकें।
कितनी देर रुकें: 2-5 मिनटगले की ओर ध्यान ले जाता है और साँस को धीमा करता है, जिससे नर्वस सिस्टम शांत हो सकता है।
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7
विपरीत करणी (दीवार पर पैर)
Viparita Karani
- दीवार के पास बगल से बैठें, फिर पीछे लेटते हुए दोनों पैर दीवार पर ऊपर ले जाएँ।
- हाथ शरीर के पास रखें और पैरों को दीवार के सहारे ढीला छोड़ दें।
- आराम लगे तो कूल्हों के नीचे मुड़ा हुआ कंबल रखें।
- धीरे-धीरे साँस लें। बाहर आने के लिए घुटने मोड़ें और एक करवट लें।
कितनी देर रुकें: 3-5 मिनटपूरे उल्टे आसनों का हल्का, आराम देने वाला विकल्प, जो थकान कम कर सकता है। अगर आपका हाई BP कंट्रोल में नहीं है या ग्लूकोमा है, तो इसे न करें।
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प्राकृतिक और आयुर्वेदिक नुस्खे
आयोडीन संतुलित रखें, ज़्यादा नहीं
कैसे करें: आयोडीन वाला नमक सीमित मात्रा में लें, और अगर आपको सूट करे तो मछली, दूध-दही या अंडे खाएँ। केल्प और समुद्री शैवाल (सीवीड) के सप्लीमेंट तभी लें जब डॉक्टर कहें।
यह क्यों फ़ायदा करता है: थायराइड को आयोडीन चाहिए, लेकिन बहुत कम और बहुत ज़्यादा, दोनों ही इसे बिगाड़ सकते हैं। ज़्यादा आयोडीन कुछ थायराइड बीमारियों को बढ़ा सकता है, ख़ासकर हाइपरथायराइडिज्म और हाशिमोटो को।
खाने से सेलेनियम
कैसे करें: सेलेनियम वाली चीज़ें खाएँ, जैसे हफ़्ते में कुछ बार एक-दो ब्राज़ील नट्स, मछली, अंडे, सूरजमुखी के बीज और दालें। बिना सलाह के ज़्यादा डोज़ वाले सेलेनियम सप्लीमेंट न लें।
यह क्यों फ़ायदा करता है: थायराइड में काफ़ी सेलेनियम होता है, और कुछ स्टडीज़ बताती हैं कि यह ऑटोइम्यून थायराइड में मदद कर सकता है। लेकिन ज़्यादा सेलेनियम ज़हरीला होता है।
पकी हुई गोभी जैसी सब्ज़ियाँ
कैसे करें: ब्रोकली, पत्ता गोभी, फूलगोभी और केल को पकाकर खाएँ, बहुत ज़्यादा मात्रा में कच्चा नहीं, ख़ासकर अगर आपके खाने में आयोडीन कम है।
यह क्यों फ़ायदा करता है: ये सब्ज़ियाँ सेहतमंद हैं। पकाने से वे तत्व कम हो जाते हैं जो बहुत ज़्यादा कच्ची मात्रा में आयोडीन के इस्तेमाल में रुकावट डाल सकते हैं।
थायराइड की दवा सही समय पर लें
कैसे करें: लेवोथायरोक्सिन (थायराइड की गोली) ख़ाली पेट पानी के साथ लें, आमतौर पर नाश्ते से 30-60 मिनट पहले। कैल्शियम, आयरन, सोया और कॉफ़ी को डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट के बताए अनुसार दवा से दूरी पर रखें।
यह क्यों फ़ायदा करता है: खाना, कॉफ़ी और कुछ सप्लीमेंट दवा का असर कम कर देते हैं, जिससे आपका लेवल ऊपर-नीचे हो सकता है।
गरम, पौष्टिक खाना
कैसे करें: नियमित और संतुलित खाना खाएँ जिसमें प्रोटीन, सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज हों। थायराइड कम हो तो अदरक और काली मिर्च जैसे गरम मसाले डालें, थायराइड ज़्यादा हो तो खीरा और धनिया जैसी ठंडक देने वाली चीज़ें ज़्यादा लें।
यह क्यों फ़ायदा करता है: नियमित खाना एनर्जी और वज़न को संभालता है, और आयुर्वेद के ये बदलाव शरीर को ज़रूरी गरमाहट या ठंडक देते हैं।
काम आने वाले प्रोडक्ट
Amazon Associate के रूप में हमें योग्य खरीदारी पर कमीशन मिलता है, आपकी कीमत नहीं बढ़ती। कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर से पूछें, खासकर गर्भावस्था में या अगर आप दवाइयाँ लेते हैं।
रोज़ की आदतें
- थायराइड की दवा रोज़ एक ही समय पर लें।
- डॉक्टर जितनी बार कहें, उतनी बार खून की जांच कराएँ, ख़ासकर डोज़ बदलने के बाद या प्रेगनेंसी में।
- ज़्यादातर दिनों में टहलें या हल्का योग करें, और अपनी एनर्जी के हिसाब से तेज़ी कम-ज़्यादा करें।
- सोने का समय तय रखें और शाम को शांत दिनचर्या अपनाएँ, ताकि नींद अच्छी आए।
- stress कम करने के लिए रोज़ पाँच मिनट धीमी साँस या रिलैक्सेशन करें।
- लक्षणों की डायरी रखें (एनर्जी, मूड, वज़न, धड़कन) और डॉक्टर को दिखाएँ।
- डॉक्टर को अपनी हर जड़ी-बूटी और सप्लीमेंट के बारे में बताएँ, बायोटिन के बारे में भी, क्योंकि यह थायराइड की जांच के नतीजे ग़लत कर सकता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
क्या योग से हाइपोथायराइडिज्म ठीक हो सकता है?
नहीं। योग थायराइड की बीमारी को ठीक नहीं कर सकता और न ही थायराइड हार्मोन की जगह ले सकता है। यह stress, एनर्जी, मूड और जीवन की गुणवत्ता में मदद कर सकता है, और डॉक्टर के बताए इलाज के साथ सबसे अच्छा काम करता है।
थायराइड के लिए कौन से योगासन अच्छे हैं?
छाती और गले को खोलने वाले हल्के आसन, जैसे सेतुबंधासन, भुजंगासन, सहारे वाला मत्स्यासन, मार्जरी आसन और विपरीत करणी, ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित हैं। सर्वांगासन और हलासन अक्सर बताए जाते हैं, लेकिन इनमें गर्दन पर बहुत दबाव पड़ता है और ये शुरुआत करने वालों के लिए ठीक नहीं हैं।
क्या अश्वगंधा थायराइड के लिए अच्छा है?
अश्वगंधा थायराइड हार्मोन का लेवल बढ़ा सकता है, जो नुकसानदायक या जोखिम भरा हो सकता है, ख़ासकर थायराइड ज़्यादा होने पर या थायराइड की दवा लेते समय। इसे सिर्फ़ डॉक्टर की सहमति से और खून की जांच के साथ लें।
क्या थायराइड में ज़्यादा आयोडीन खाना चाहिए?
सिर्फ़ तभी, जब आपमें सच में आयोडीन की कमी हो। आज भारत में ज़्यादातर घरों में आयोडीन वाला नमक इस्तेमाल होता है, इसलिए ज़्यादातर लोगों को आयोडीन वाले नमक और मिले-जुले खाने से काफ़ी आयोडीन मिल जाता है, और ज़्यादा आयोडीन थायराइड की समस्या पैदा कर सकता है या उसे बढ़ा सकता है। सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से पूछें।
सावधानी · डॉक्टर को कब दिखाएँ
थायराइड की बीमारी में खून की जांच से सही पहचान और डॉक्टर का इलाज ज़रूरी है। डॉक्टर से पूछे बिना थायराइड की दवा कभी बंद न करें और न ही बदलें। अगर गर्दन में गाँठ या सूजन दिखे, निगलने या साँस लेने में दिक़्क़त हो, आवाज़ लंबे समय तक बैठी रहे, धड़कन तेज़ या अनियमित हो, बिना वजह वज़न बदले, आँखें बाहर निकली हुई लगें या उनमें दर्द हो, या लगातार बहुत थकान रहे, तो डॉक्टर को दिखाएँ। थायराइड ज़्यादा होने पर, जब तक लेवल कंट्रोल न हो, तेज़ व्यायाम और गर्मी से बचें। सर्वांगासन और हलासन तभी करें जब किसी टीचर से सामने बैठकर सीखे हों, और अगर घेंघा, गाँठें हैं या थायराइड की सर्जरी हुई है, तो गर्दन को हल्के से ही हिलाएँ। आयोडीन, केल्प, सेलेनियम और अश्वगंधा के सप्लीमेंट थायराइड का संतुलन बिगाड़ सकते हैं, और कैल्शियम, आयरन, सोया और कॉफ़ी लेवोथायरोक्सिन का असर कम करते हैं। बायोटिन सप्लीमेंट खून की जांच के नतीजे ग़लत कर सकते हैं। ये अभ्यास आपके इलाज में साथ देते हैं, उसकी जगह नहीं लेते।
यह गाइड सिर्फ़ आम जानकारी के लिए है और डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेती। आराम से अभ्यास करें, दर्द होने तक कभी न खिंचें, और अगर आपको कोई बीमारी है, आप गर्भवती हैं या कोई दवा ले रहे हैं, तो किसी योग्य विशेषज्ञ से बात करें।